
: The prayer expresses profound sorrow, with lines such as, "Peace be upon the loneliest of the lonely" and "Peace be upon the one drenched in his own blood". 3. Ziyarat-e-Nahiya in Hindi & Roman Script
ज़ियारतनामे में, श्रद्धालु इमाम हुसैन (अस) को संबोधित करते हैं और उनके प्रति अपने प्रेम और श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं। यह प्रार्थना एक पवित्र और भावनात्मक अनुभव प्रदान करती है जो श्रद्धालुओं को अपने इमाम के साथ जुड़ने और उनके प्रेम को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है।
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ज़ियारत-ए-नहिया: कर्बला का दर्द और इमाम-ए-ज़माना (अ.त.फ़.श.) का विलाप प्रस्तावना ziyarat e nahiya in hindi
"ऐ अबा अब्दिल्लाह! मैं आप पर सलाम भेजता हूँ, उस दर्द और मुसीबत पर जो आपने झेली। आप पर लानत हो उन लोगों की जिन्होंने आपके खिलाफ जंग की, आप पर लानत हो उन लोगों की जिन्होंने आपके मकतल (शहादत की जगह) की नींह रखी। मैं आपके दुश्मनों से बेज़ार हूँ, और आपके मकाम (उच्च स्थान) को क़ुर्बानी के तौर पर पेश करता हूँ।"
पैगंबर के परिवार के प्रति अटूट निष्ठा।
यह ज़ियारत एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ की तरह है जो कर्बला में यज़ीदी सेना द्वारा किए गए अत्याचारों को पूरी सच्चाई के साथ बयां करती है।
"सलाम हो हुसैन पर, जिन्होंने अपनी जान अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी। सलाम हो उस पर जिसकी छिपी और ज़ाहिर इबादत अल्लाह के लिए थी। सलाम हो उस पर जिसके ख़ून से मिट्टी पाक हो गई।" : The prayer expresses profound sorrow, with lines
यह ज़ियारत 'मफातीहुल जिनान' और 'बिहारुल अनवार' जैसी प्रसिद्ध किताबों में मौजूद है, जो इसे विश्वसनीय बनाती है।
इमाम महदी (अ.स.) इसमें अपने दादा के जिस्म पर लगे तीरों और तलवारों के घावों का ज़िक्र करते हैं।
वुज़ू करें और पाक-साफ लिबास पहनें।
: Many channels provide the full Ziyarat with Hindi subtitles , which is excellent for those who prefer listening (Areez) while following the meaning. 💡 User Tip In Hindi/Urdu translations, the use of emotive vocabulary
इस ज़ियारत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जो कर्बला के शहीदों के नाम (एक-एक करके) और उनके कातिलों के नाम भी बयान करती है। इसमें हज़रत अब्बास (अ.स.), हज़रत अली अकबर (अ.स.), हज़रत कासिम (अ.स.) और तमाम यारों-अनसार को सलाम करके उनके जज्बे और कुर्बानी को सलाम किया जाता है। इन सोलह साथियों के अलावा, अन्य पचपन साथियों की भी चर्चा है जिन्होंने इमाम (अ.स.) का साथ दिया।
: Unlike shorter Ziyarats, this text provides a vivid, heart-wrenching account of the suffering of Imam Hussain (a.s.) and his family. In Hindi/Urdu translations, the use of emotive vocabulary often helps local readers connect more deeply with the Masaib (afflictions).
ज़ियारत ए नहिया के दौरान, श्रद्धालु इमाम हुसैन (अस) के मज़ार पर जाते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। यह यात्रा न केवल एक पवित्र यात्रा है, बल्कि यह एक भावनात्मक अनुभव भी है जो श्रद्धालुओं को अपने इमाम के साथ जुड़ने और उनके प्रेम को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है।